आदि से अनंत तक, सृष्टि से संहार तक जो स्वयं समय के भी स्वामी हैं, जो शून्य में स्थित होकर भी संपूर्ण ब्रह्मांड को धारण करते हैं, जिनकी जटाओं से बहती गंगाजल की धारा, और जिनके डमरू से उत्पन्न हुआ प्रथम नाद। आज प्रस्तुत है—महादेव की महिमा को समर्पित एक दिव्य स्तुति, एक आध्यात्मिक यात्रा, एक प्रार्थना, एक अर्पण जो आत्मा को शांत भी करती है और भीतर ऊर्जा भी भर देती है। आइए, शिव के चरणों में मन अर्पित करें महाकाल पर कविता – श्री महाकाल तांडव स्तुति में …

महाकाल पर कविता

महाकाल पर कविता

सदाशिव शंकर महेश्वर महेश,
परमेश्वर त्रिलोचन त्रयंबक त्रिनेत्र।

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,
भव-भय हरन भोलेनाथ, जय जय शिव शंकराय॥

प्रचंड-तांडव-नृत्य-रत, दिगंबर-विश्वरूपम्,
शून्य-हृदय-निवासी, पूर्ण-ब्रह्म-अनुपमम्।

अनादि-अनंत-कालचक्र-अधिपति, महादेव-महंतम्,
क्षण-भंगुर-लीलाधारी, विभु-अविनाशी-अनंतम्॥

जटा-कटाह-संभ्रम-भ्रमन्-निलिम्प-निर्झरी,
शीश-शशांक-धवल-दीप्ति, अमृत-रस-झरी।

व्याल-कराल-माल-कंठ, भस्म-विलेपन-धारी,
वैराग्य-पुंज-महायोगी, त्रिपुर-अरि-विनाशकारी॥

त्रिशूल-धारिणी-शक्ति, न्याय-वज्र-प्रहारम्,
डमरू-नाद-गुंजित-ब्रह्मांड, सृजन-स्वर-सारम्।

महानाश-कुक्षि-स्थित, नूतन-सृष्टि-विधानम्,
रुद्र-भीषण-संहार, शिव-सौम्य-निर्माणम्॥

काल-काल-महाकाल, काल-जयी-अनामी,
चराचर-जगत-रक्षक, विश्वेश्वर-स्वामी।

करुणा-पारावार-शंभू, तारन-तरन-हारी,
शरण्य-चरण-कमल-अर्पित, जय-जय-पुरारी॥

ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,
हर हर महादेव, जय शिव शंकराय॥

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रचनाकार का परिचय

बाल कृष्ण मिश्रा

यह कविता हमें भेजी है बाल कृष्ण मिश्रा जी ने फ़्लैट नंबर 253, भूतल, श्री कृष्ण अपार्टमेंट, जे-2, सेक्टर 16, रोहिणी, नई दिल्ली से।

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