कविता मन की आँखों से | Kavita Man Ki Aankhon Se

+2

आप पढ़ रहे हैं कविता मन की आँखों से :-

कविता मन की आँखों से

कविता मन की आँखों से

गुमनाम गलियों में गीत बहारों के गाते हैं
पतझड़ में भी फूल हर डाली पे खिलाते हैं ।

मन की आंखो से सुंदर सा ख्वाब सजाया है
गम की काली बदली में खुशियों का फूल खिलाया है

जून की तपती दोपहरी में शिमला का रंग अपनाया है
धूप मिली छाव मिली हर पल कदम बढ़ाया है

सर्द जनवरी भी हमने तपती धूप सा पांव जलाया है
वो दिन भी याद मुझे जब आंखो से सागर बरसाया है

फूलों में हर पल चुभते कांटे सा दर्द समाया है
बिखरे अरमानों को सिमटा कर जीवन पथ अपनाया है

अंधेरी गलियों से भी चुन चुन कंटक उठाया है
आंखे हर पल राह निहारे कैसी दस्तक कैसा साया है ।

पढ़िए :- हिंदी कविता अजनबी बनकर


रचनाकार कर परिचय :-

अवस्थी कल्पनानाम – अवस्थी कल्पना
पता – इंद्रलोक हाइड्रिल कॉलोनी , कृष्णा नगर , लखनऊ
शिक्षा – एम. ए . बीएड . एम. एड

“ कविता मन की आँखों से ” ( Kavita Man Ki Aankhon Se ) के बारे में कृपया अपने विचार कमेंट बॉक्स में जरूर लिखें। जिससे लेखक का हौसला और सम्मान बढ़ाया जा सके और हमें उनकी और रचनाएँ पढ़ने का मौका मिले।

यदि आप भी रखते हैं लिखने का हुनर और चाहते हैं कि आपकी रचनाएँ हमारे ब्लॉग के जरिये लोगों तक पहुंचे तो लिख भेजिए अपनी रचनाएँ hindipyala@gmail.com पर या फिर हमारे व्हाट्सएप्प नंबर 9115672434 पर।

हम करेंगे आपकी प्रतिभाओं का सम्मान और देंगे आपको एक नया मंच।

धन्यवाद।

+2
Share on whatsapp
WhatsApp
Share on telegram
Telegram
Share on facebook
Facebook
Share on twitter
Twitter
Share on email
Email

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *