मेरी अभिलाषा पर कविता | Meri Abhilasha Hindi Poem

हर व्यक्ति के जीवन की कुछ न कुछ अभिलाषा अवश्य होती है। कोई धन मांगता है कोई वैभव मगर एक इंसान की सच्च्ची कामना क्या होनी होती है? जानिए इस ( Meri Abhilasha Kavita ) मेरी अभिलाषा पर कविता में :-

मेरी अभिलाषा पर कविता

मेरी अभिलाषा पर कविता

ज्यादा कुछ न मै तुमसे चाहूँ
बस आशीष मुझे तुम दे देना।
मेरे ह्रदय में बसकर प्रभु तुम
मानवता का रस भर देना।
देना मुझको बुध्दि ऐसी कि
सबको सच्ची राह दिखा पाऊँ।
मै तो चाहूँ मेरे प्यारे प्रभु बस
मै यह मानव धर्म निभा पाऊँ।

न मांगू मै कोई हीरे-मोती
न मैं सोना और चांदी चाहूँ।
निर्बल और निराश्रित जन के,
अधरों पर मुस्कान दिलाऊँ।
देना मुझको धन इतना कि,
निर्धनों का मैं सहारा बनूँ।
मै तो चाहूँ मेरे प्यारे प्रभु बस
मै यह मानव धर्म निभा पाऊँ।

न चाहूँ शिलान्याश पर आना
न इतिहास के पन्नों में आऊँ।
दिव्यांग और संत जनों को,
बस इक पहचान दिला पाऊं।
देना मुझको बैभव इतना कि
अनाथालयों के काम करूँ।
मै तो चाहूँ मेरे प्यारे प्रभु बस
मै यह मानव धर्म निभा पाऊँ।

मुझे देना साहस इतना सा,
कि कायरों में जोश जगाऊँ।
देश रक्षा करने की खातिर
सबका ही योगदान दिलाऊं।
देना मुझको सूझबूझ इतनी,
कि देश प्रेम का भाव समझूँ।
मै तो चाहूँ मेरे प्यारे प्रभु बस
मै यह मानव धर्म निभा पाऊँ।

धर्म-जाति का भेद रखूं न,
न किसी मोह में फंसना चाहूँ।
देश प्रेम की खातिर मै अपना
सबकुछ कुरबान कर जाऊँ।
देना मुझमे स्वाभिमान इतना,
कि,सैनिकों का सम्मान करूँ।
मै तो चाहूँ मेरे प्यारे प्रभु बस
मै यह मानव धर्म निभा पाऊँ।

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हरीश चमोली

मेरा नाम हरीश चमोली है और मैं उत्तराखंड के टेहरी गढ़वाल जिले का रहें वाला एक छोटा सा कवि ह्रदयी व्यक्ति हूँ। बचपन से ही मुझे लिखने का शौक है और मैं अपनी सकारात्मक सोच से देश, समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जीवन के किसी पड़ाव पर कभी किसी मंच पर बोलने का मौका मिले तो ये मेरे लिए सौभाग्य की बात होगी।

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