नशा मुक्ति दिवस पर स्लोगन , दोहे , शायरी | Nasha Mukti Divas Par Slogan

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Nasha Mukti Divas Par Slogan , Dohe , Shayari – नशा मुक्ति दिवस पर स्लोगन , दोहे , शायरी – प्रिय पाठकों , आज के समय में हर कोई पाश्चात्य संस्कृति की तरफ भाग रहा है और देखादेखी में वह नशे की लत का शिकार हो रहा है। यहाँ तक की आजकल महिलायें और समाज का युवावर्ग भी नशे की लत के शिकार है हमारी संस्कृति और समाज न जाने किस दिशा में जा रहा यह एक गंभीर विषय है। हम सबको इसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे और नशा मुक्ति अभियान चलाना होगा और सबको जागरूक बनाना होगा की नशे से सिर्फ उनको ही नहीं अपितु उनके परिवारों को भी नुकसान है।

यह व्यक्ति की समाज में बनी बनायीं प्रतिष्ठा को भी ख़त्म कर देता और यहाँ तक की कई घिनोने अपराधों को जन्म देता है इसलिए आज ही प्राण करें की आज के बाद किसी भी तरह के नशे को हाथ भी नहीं लगायेंगे। इसके लिए आपको अपने सच्चे मन से संकल्प लेना होगा तब ही आप किसी नशे को त्याग सकते हैं। तो आइये आज की नशा मुक्ति दिवस पर स्लोगन पढ़कर नशा मुक्त होने का संकल्प लें –

नशा मुक्ति दिवस पर स्लोगन

नशा मुक्ति दिवस पर स्लोगन1.
कबहु नशा मत कीजिए।
यह अवगुण है जीवन काल।।
जो नशा कछू है करा।
आज ही दीजे निकाल।।
2.
जो साजन मदिरा पिये।
नाही सजनी के जोग।।
रोज नशा मे रत रहे।
हजार सता रहे रोग।।
3.
नशा रोग हद से बढे।
मिट जाये घर द्वार ।।
छूट गये रिश्ते सगे ।
घर मे मचाये रार।।
4.
सब मेहनत की पूँजी।
नशा पत्ता में जाये।
सुत दारा दुश्मन भये।
प्रीती दूर हो जाये।
5.
सद्बुद्धी धू मिली रही।
कबहु किये नही सत्काम।।
राहू की भई बक्रगति।
बिगड़ गये सब काम।।
6.
आब गयी इज्जत गयी।
गया मान सम्मान ।
यह गैल सर्वनाश की।
नहीं चलिये सुजान।।
7.
कंचन जैसी देह का ।
नशा करे है नाश।
नशा कबहु न कीजिए ।
यह नरक की बाट।।

पढ़िए – चरित्र निर्माण पर कविता “मूल्यांकन”


रचनाकार परिचय

मैं सौदामिनी खरे पति स्व0अशोक खरे।

मैं एक शिक्षिका हूँ रायसेन जिले की निवासी हूँ। हिन्दी साहित्य की सेवा करना अपना सौभाग्य समझती हूँ, सभी रस पर लेखन करना मेरी विधा गीत, गजल, दोहे छंद कविता नज्म आदि है।

अभी तक साझा संकलन, कश्तियो का सफर ,काव्य रंगोली में, तथा मासिक पत्रिका ग्यान सागर मे प्रकाशित हुई है हिन्दी भाषा डाट काम पर भी रचनाऐ प्रकाशित हुई है,नव सृजन कल्याण समिति की फाउन्डर मेम्बर मे मीडिया प्रभारी हूँ ।

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