प्रकृति पर छोटी कविता – ये है हाथों के हुनर की खुशहाली

पर्यावरण की खूबसूरती को बयान करती प्रकृति पर छोटी कविता ( Prakriti Par Choti Kavita ) :-

प्रकृति पर छोटी कविता

पर्यावरण पर छोटी कविता

वृक्ष रहेंगे हरे भरे
यदि,सुरक्षा मनुज करें
पर्यावरण हित संवर्धन को
पौधे रोपें नये, नये।

खेतों में अन्न,धन, सोना,हीरे
धरा का आँचल हँसकर उगले
बाग, बगीचे में फल फूल खिलेंगे
उपवन चहकेंगे गुलशन महकेंगे।

बदरा छाये झूम के बरसे
तपती धरा के नैन भी हरषे
कोकिल,चिरैया पिक, शुक मोर
चहके जैसे नाच रहा मनमोर।

धानी चुनरी प्रकृति को ओढाना
दोनों हाथों से पोषित करना
सेवा करना ,रक्षा करना
मन के सुसंकल्प में रंग भरना।

दोनों हाथों से सींचो झारी
हरषे सृष्टि रंग रंगीली प्यारी
चहुँओर हँसे फैली हरियाली
ये है हाथों के हुनर की खुशहाली।

नवपल्लव, नवदुकुल के गहने
प्रकृति के अद्भुत श्रंगार ने पहने
धरा संग हिलमिल होंगी अठखेली
दोनों ही हों ज्यों अनुपम सहेली।


स्वपरिचय ~

नाम ~ सीमा गर्ग मंजरी
पति का नाम ~ सुमन कुमार गर्ग
जन्म तारीख ~ 11 जौलाई
शिक्षा ~ हिन्दी, आनर्स ग्रैजुएट
व्यवसाय ~ गृहणी
मो नं 8958229442
ईमेल ~ Seemagarg1107@gmail.com
स्थाईपता ~ 101 राजनकुँज रूडकीरोड मेरठ शहर।
विधा लेखन ~ कविता,गीत,गजल लघुकथा,कहानी, लेख, समीक्षा।

प्रकाशित पुस्तकें ~एक पहाडी गूँज उत्तराखंड सांझा काव्य संग्रह
एक एकल काव्य संग्रह ~ भाव मंजरी प्रकाशित।
पाँच सांझा काव्य संग्रह प्रकाशित ~
प्रखरगूँज के साथ
गाता रहे मेरा दिल
एवं मुक्त तरंगिणी।
वर्तमान अंकुर के काव्य संग्रह
पहाड़ी गूँज में
वुमन नारी काव्य संग्रह में
साहित्य पीडिया काव्य संग्रह में

पाँच सांझा काव्य संग्रह प्रकाशन में हैं।

श्री श्री रविशंकर जी के आर्ट आँफ लिंविंग की सदस्या हूँ। यहाँ पर टी. टी. पी. कोर्स को करके बच्चों को संस्कार और संस्कृति की शिक्षा देने के लिए प्रयासरत हूँ।
अपने नजदीक मन्दिर समिति की सदस्या हूँ। जहाँ अनेक धार्मिक एवं सामाजिक कार्यों को हम सहयोगी सदस्य सम्पन्न करते हैं।

निवेदिका ~
सीमा गर्ग मंजरी
मेरठ।


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