प्रेम कविता – मधुर स्मृति | Prem Kavita Madhur Smriti

प्रेम कविता – मधुर स्मृति

प्रिय पाठकों जिन्दगी हमारे इम्तिहान तो लेती ही रहती है लेकिन सबसे बड़ा झटका तब लगता है जब प्यार में विफलता मिलती है और उसी प्रेम को याद करते हुए पढ़िए यह कविता –

प्रेम कविता मधुर स्मृति

प्रेम कविता - मधुर स्मृति (हिंदी प्रेम कविता )

 

आज मैं तुम्हें न पा सका,
इसलिए न गीत गा सका।
बहार फूल तो खिले मगर,
मिले उसे भ्रमर न हो‌ अगर,
तो आश क्या कि फूल की उमर,
हंसे नियति हिलोर में लहर।

जोहता रहा तुम्हे सदा,
उठी कसक न मैं भगा सका।

लगी आज टकटकी उधर,
चली गई थी रूठकर जिधर
हुआ हताश आज मैं मगर,
रहे न याद प्यार के प्रहर,

‌ रही सदा सुदूर प्राण, तुम
इसीलिए तुम्हें न पा सका।

पी रही हैं जिन्दगी जहर,
घिर रही है वेदना घहर,
कट रही है व्यर्थ ही उमर,
निराश दीप जल रहा लहर,

विघ्न पर विघ्न झेलता,
पुकारता तुम्हें न पा सका।

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रचनाकार का परिचय –

कालिका प्रसाद सेमवाल

नाम—कालिका प्रसाद सेमवाल
शिक्षा—एम०ए०, भूगोल, शिक्षा शास्त्र
आपदा प्रबंधन, व्यक्तित्व विकास फाउंडेशन कोर्स विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए बी०एड० सम्प्रति व्याख्यात
सेवारत —जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा रूद्रप्रयाग उत्तराखंड
प्रकाशित पुस्तकें–रूद्रप्रयाग दर्शन
अमर उजाला,दैनिक जागरण ,हिंदुस्तान व पंजाब केसरी विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में धर्म संस्कृति व सम सामयिक लेख प्रकाशित होते हैं ,उत्तराखंड विघालयी शिक्षा की हमारे आसपास,कक्षा 3,4,5, और कक्षा 6 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक लेखन समिति के सदस्य और लेखक भी हैं।

अब तक प्राप्त सम्मान—
रेड एण्ड व्हाईट पुरस्कार, हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग द्वारा साहित्यभूषण, साहित्य मनीषी,अन्य मानस श्री कालिदास सम्मान,उत्तराखंड गौरव साहित्य मण्डल, श्रीनाथ द्वारा साहित्य रत्न, साहित्य महोपाध्याय सम्मानोपधि व देश की विभिन्न संगठनों द्वारा साहित्य में पचास से अधिक सम्मान मिल चुके है
पता—मानस सदन अपर बाजार
रूद्रप्रयाग उत्तराखंड
पिनकोड 246171


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