राखी पर कविता :- वो भैया ही मेरा | Rakhi Par Kavita

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एक बहन के लिए उसके भाई का जीवन में क्या महत्त्व होता है आइये जानते हैं इस ( Rakhi Par Kavita ) राखी पर कविता ” वो भैया ही मेरा ” :-

राखी पर कविता

राखी पर कविता

जब मन मेरा घबराये भैया को पता चल जाये।
तब हाथ पकड़ के मेरा मुझे अपने पास बिठाये।
वो भैया ही मेरा रखवाला है,पल पल मुझे संभाला है।।

जब बाबा छोड़ गया था तब घर में तू ही बड़ा था।
मैंया बहना के दुख में, तू ही साथ खड़ा था।
तूने माँ को गले लगाया, बाँहो में मुझे झुलाया।
मैं हरपल साथ हूँ तेरे,माँ को एहसास कराया ।
वो भैया ही मेरा रखवाला है पल पल मुझे संभाला है।

दर्द को सहते सहते माँ कितना टूट गई थी।
रोती रहती दिन रैना किस्मत ही रूठ गई थी।
तब आकर तू समझाया, मैंया मैं तेरी जाया।
माँ का तू बना सहारा, तू लाड़ला माँ का प्यारा।।
वो भैया ही मेरा रखवाला है पल पल मुझे संभाला है ।।

तू बनजा भाई कन्हैया, मै सुभद्रा बन जाऊँ ।
इस पर्व में भैया तेरे,माथे पे तिलक लगाऊँ ।
मैं दूर चली भी जाऊँ राखी में दौड़ कर आऊँ ।
बाँध के रक्षा बंधन आशीष सदा मैं पाऊँ ।
वो भैया ही मेरा रखवाला है पल पल मुझे संभाला है ।।

वो भैया ही मेरा रखवाला है पल पल मुझे संभाला है ।।

पढ़िए :- रक्षाबंधन पर शायरी | राखी पर भाई और बहन की शायरी


रचनाकार का परिचय :-

श्रीमती केवरा यदु " मीरा "यह कविता हमें भेजी है श्रीमती केवरा यदु ” मीरा “ जी ने। जो राजिम (छतीसगढ़) जिला गरियाबंद की रहने वाली हैं। उनकी कुछ प्रकाशित पुस्तकें इस तरह हैं :-
1- 1997 राजीवलोचन भजनांजली
2- 2015 में सुन ले जिया के मोर बात ।
3-2016 देवी गीत भाग 1
4- 2016 देवीगीत भाग 2
5 – 2016 शक्ति चालीसा
6-2016 होली गीत
7-2017  साझा संकलन आपकी ही परछाई।2017
8- 2018 साझा संकलन ( नई उड़ान )

इसके अतिरिक्त इनकी अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचनायें प्रकाशित हो चुकी हैं। इन्हें इनकी रचनाओं के लिए लगभग 50 बार सम्मानित किया जा चुका है। इन्हें वूमन आवाज का सम्मान भी भोपाल से मिल चुका है।
लेखन विधा – गीत, गजल, भजन, सायली- दोहा, छंद, हाइकु पिरामिड-विधा।
उल्लेखनीय- समाज सेवा बेटियों को प्रशिक्षित करना बचाव हेतु । महिलाओं को न्याय दिलाने हेतु मदद गरीबों की सेवा।

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