माँ पर मार्मिक कविता – बेटा पूज रहा पत्थर | Poem On Mother

आप पढ़ रहे हैं ( Short Poem On Mother In Hindi ) माँ पर मार्मिक कविता :-

माँ पर मार्मिक कविता

माँ पर मार्मिक कविता

इस झूठे मूठे जग में पैसों की मारो मार पड़ी हैं।
बेटा पूज रहा पत्थर को माँ घर में बीमार पडी़ हैं।

ज़ननी को ही रब मानने वाले
कहाँ गये हैं वो संस्कार सब
सब को एक जुट रखने वाले
कहाँ गये हैं वो परिवार सब
माँ ममता का सागर हैं भली भाँति परचित हो पर,
उस ममता के उम्मीदों की टूटी हुई पतवार पडी़ हैं।
बेटा पूज रहा पत्थर को………. ….. ………..।।१

माँ के चरणो को पूजो गर तो
स्वर्ग यही मिल जायेगा
हो निषकाशित नफरत उर से
प्रेमं पुनः खिल जायेगा
पर कैंसे ये सम्भव हो नित रोते ये विचार लिए वो,
जब माँ बेटे के बीच में ही बहू नाम दिवार पडी़ हैं।
बेटा पूज रहा पत्थर को………. ….. ………..।।२

उनके ह्रदय से पूछो ज़रा तुम
प्यार मिला ना माँ का ज़िनको
जब सुनते होंगे वो ऐसी कथायें
क्या होता होगा उनके मन को
कहने को तो उस माँ के हैं चार चार बेटे लेकिन,
किस्मत देखो आज वही बिस्तर पेलाचार पडी़ हैं।
बेटा पूज रहा पत्थर को………. ….. ………..।।३

इस झूठे मूठे जग में पैसो की मारो मार पडी़ हैं।
बेटा पूज रहा पत्थर को माँ घर में बीमार पडी़ हैं।

पढ़िए :- माँ की याद पर कविता “माँ तुम्हारी याद आती है”


कवि अनमोल रतनयह कविता हमें भेजी है कवि अनमोल रतन जी ने रायबरेली, उत्तर प्रदेश से।

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