परिश्रम पर कविता :- निरंतर परिश्रम करते रहना | Parishram Par Kavita

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परिश्रम पर कविता

परिश्रम पर कविता

मार्ग मुश्किलों से भरा हो
धैर्य नहीं कभी खोना तुम।
निरंतर परिश्रम करते रहना
निराश हो नहीं रोना तुम।।

झोंक देना संपूर्ण साहस को
क्षण भर न तुम करना आलस।
अपनी असीमित क्षमताओं पे
सच्चे ह्रदय से करना विश्वास।।

विपरीत परिस्थितियां तुझको
प्रकोप से अपने करे भयभीत।
जीत का गीत गुनगनाते चलना
कभी मत बनना तुम अतीत।।

संघर्ष से डर के नहीं भागना
ज्ञान का शस्त्र करना धारण।
महत्वपर्ण अगर करना कुछ
तो खोजना भीतर कोई कारण।।

तुम एक अनोखे हो जग में
संसार के सफल तुम वीर हो।
भविष्य की उभरने वाली कोई
अदभुद सी अमूल्य तस्वीर हो।।

ब्रह्मांड का तुझे आशीष है
फिर परवाह है किस बात की।
आज अगर घोर अंधेरा है तो
निकलेगी रश्मि कल प्रभात की।।

तुम अपनी अमूल्य क्षमताये
चंद सिक्कों में नहीं बिकने देना।
लाखो के कीमती विचारों को
सबके समक्ष तुम दिखने देना।।

विद्वान जो कह कर गए
सदैव चलना तुम उस राह में।
स्वपन तुम्हारे आकर्षित होगे
प्रबल इच्छाओ की चाह में।।

पढ़िए :- कठिनाई पर कविता ” कठिनाइयां तो हैं वरदान “


नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

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