हौसला बढ़ाने वाली कविता :- हौसलों के पंख लगाकर | Hausla Badhane Wali Kavita

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हौसला बढ़ाने वाली कविता

हौसला बढ़ाने वाली कविता

हौसलों के पंख लगाकर
उड़ना है मुझे अम्बर में,
हार को करके स्वीकार
जोश धारण कर ले उर में

मधुर सा कोई गीत गाकर
उत्साह भरले कठिन डगर में,
मुश्किलों का सामना करके
रुकना नहीं जीवन के सफर में।

विपत्तियां आएगी तेरे पथ में
अजब गजब से रूप बदलकर,
देखकर तू भयभीत न होना
छा जाना ज्वाला सा पिघलकर।

पग पग में बिछे होंगे कांटे
हंसकर उनको करना पार,
चिंताओं का न कैदी बनना
उतार देना मस्तिष्क से भार।

चीटियों से तुम सीखकर
देना एकता की अदभुद मिशाल,
जीवन के विपरीत क्षणों में तुम
बन जाना अपनों के लिए ढाल।

प्रयत्न तेरे न होंगे विफल
सपने सच होंगे एक दिन,
तारा है तू नील गगन का
नभ रोशन न होगा तेरे बिन।

मेहनत की माला करके धारण
पीकर प्रबल इच्छा का प्याला,
अमूल्य ज्ञान की चाबी से तुम
खोलना अपने लक्ष्य का ताला।

मानव तू खुद को न कम आंक
बाहुबल है तेरे दोनों कर में,
जैसे पानी की एक एक बूंद
सुराग कर देती है पत्थर में।

पढ़िए :- जोश भरने वाली कविता “प्रबल इच्छा ने जब ललकारा”


नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

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