हिंदी कविता अग्निपरीक्षा | Hindi Kavita Agnipariksha

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हिंदी कविता अग्निपरीक्षा

हिंदी कविता अग्निपरीक्षा

सीताजी ने दी थी जो परीक्षा।
वह थी अग्निपरीक्षा।
पतिव्रता सतवंती नारी की कठिन परीक्षा।
पर क्यों नहीं होती पुरुषों की अग्निपरीक्षा।

जब प्रकृति में नर और नारी
दोनों ही है इंसान।
तो नर क्यों बनता है बेईमान।

नर का विलोम नारी नहीं होता।
नारी सर्वशक्तिमान होती।
पर जब बात अग्निपरीक्षा की आती।
तो नारी पर ही क्यों थोपी जाती।

हर नर के विकास में होता है नारी का हाथ।
दोनों को मिलजुल कर ही देना होगा साथ।

फिर नही देनी पड़ेगी अकेली नारी को अग्नि परीक्षा।

अरे यह नारी नहीं होती।
तो यह संसार ही नहीं रचता।
ना तू इतना इठला पाता।
और न ही तू परीक्षा ले पाता।

नारी की अग्निपरीक्षा से भी, बढ़ा है तेरा ही मान।
इसलिए हंसराज हंस कहता है,
अब तू रख नारी की आन बान शान।


“रचनाकार का परिचय

हंसराज "हंस"
हंसराज “हंस” जी गत 30 वर्षो से अध्यापन का कार्य करवा रहे है। शिक्षा मे नवाचारों के पक्षधर है। “हैप्पी बर्थडे” “गांव का अखबार” इनके शैक्षिक नवाचार है। शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशालाओं में संदर्भ व्यक्ति (रिसोर्स पर्सन) के रूप में 8-10 वर्षों का अनुभव रखते है। तात्कालिक मुद्दों, जयंतियों व सामाजिक कुरीतियों पर आलेख लिखते रहते। मौलिक लेख विभिन्न सामाजिक, धार्मिक व देश व प्रदेश की पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहते हैं। इसके साथ ही न्यूज पोर्टल व सोशल मीडिया के माध्यम से भी कई वेबीनारो व फेसबुक लाइव प्रसारण पर विभिन्न मंचों के माध्यम से अपने मौलिक विचारों का प्रकटीकरण करते रहते है। शिक्षक संगठन व सामाजिक संगठनों में विभिन्न दायित्वों का निर्वाह करते हुए निरंतर सामाजिक सुधारों की ओर अग्रसर है।

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