हिंदी कविता खून के पक्ष | Hindi Kavita Khoon Ke Pakhsa

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हिंदी कविता खून के पक्ष – मानव के जीवन में खून (रक्त ) का अपना विशेष महत्व होता है । मानव और मानवता के सम्बन्ध में खून ( रक्त ) के कुछ महत्वपूर्ण पक्षों का चित्रण करती हुइ घनाक्षरी छन्द में रचना प्रस्तुत है ।

हिंदी कविता खून के पक्ष

हिंदी कविता खून के पक्ष

भौतिक पक्ष

आदमी को मिलता है खून से जुनूँन यारों,
परम पिता का ए अमूल्य वरदान है ।
खून से ही चलता है जीवन हमारा सब,
करूँ कितना इसके गुँण का बखान है ।

धमनी शिराओं में निरन्तर है बना हुआ,
बिना खून के ए पूरी जिन्दगी वीरान है ।
जो होता नहीं खून कभी आदमी के नस में,
पूरा तन बन जाता शव के समान है ।

पारिवारिक पक्ष

आती है खबर रोज रोज रिश्तों के खून की,
सिद्ध होती रोज यह बात निर्विवाद है ।
खून हैं बहाते सब भाई भाई आपस में,
बढ़ रहा प्रतिदिन ढेर सा विवाद है ।

चारों ओर छाये हैं घनेरे बादल शक के ,
इसी कारण कम होता प्रायः संवाद है ।
परेशान परिवार टूट रहे आये दिन,
बढ़ता न्यायालय में नित परिवाद है ।।

दान पक्ष

युग युग से चली आ रही है प्रथा दान की,
सदियों से दान होता रहा भरपूर है ।
दान से ही बढ़ते हैं जग में प्रताप पुन्य,
सदा से ही दान रहा करना मशहूर है ।

गजदान बाजदान होता रहा सदियों से,
चलती गोदान की चलन भरपूर है ।
रक्तदान महादान करो सब उमंग से,
बच जायेगा जो बिन खून मजबूर है ।।

सामाजिक पक्ष

लगती है चोट कहीं बहती है खून धार,
दर्द होती अनुभव तन में अपार है ।
करता मदद कोई पूरे तन मन से है,
छोड़ देता कोई उसे बीच मँझधार है ।

चले जाते रास्ते से तनिक नहीं आती दया,
सोचते नहीं कोई इससे सरोकार है ।
आदमी का आदमी से खून का है रिश्ता बना,
भूल जाता सबको ए सुखद विचार है ।

पढ़िए :- भारत के रीति रिवाज कविता ( बारह मासा )


रचनाकार का परिचय

रूद्र नाथ चौबे ("रूद्र")नाम – रूद्र नाथ चौबे (“रूद्र”)
पिता- स्वर्गीय राम नयन चौबे
जन्म परिचय – 04-02-1964

जन्म स्थान— ग्राम – ददरा , पोस्ट- टीकपुर, ब्लॉक- तहबरपुर, तहसील- निजामाबाद , जनपद-आजमगढ़ , उत्तर प्रदेश (भारत) ।

शिक्षा – हाईस्कूल सन्-1981 , विषय – विज्ञान वर्ग , विद्यालय- राष्ट्रीय इंटर कालेज तहबरपुर , जनपद- आजमगढ़ ।
इंटर मीडिएट सन्- 1983 , विषय- विज्ञान वर्ग , विद्यालय – राष्ट्रीय इंटर कालेज तहबर पुर , जनपद- आजमगढ़।
स्नातक– सन् 1986 , विषय – अंग्रेजी , संस्कृत , सैन्य विज्ञान , विद्यालय – श्री शिवा डिग्री कालेज तेरहीं कप्तानगंज , आजमगढ़ , (पूर्वांचल विश्व विद्यालय जौनपुर ) उत्तर प्रदेश।

बी.एड — सन् — 1991 , पूर्वांचल विश्व विद्यालय जौनपुर , उत्तर प्रदेश (भारत)
साहित्य रत्न ( परास्नातक संस्कृत ) , हिन्दी साहित्य सम्मेलन इलाहाबाद , उत्तर प्रदेश

पेशा- अध्यापन , पद – सहायक अध्यापक
रुचि – आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियाँ , हिन्दी साहित्य , हिन्दी काव्य रचना , हिन्दी निबन्ध लेखन , गायन कला इत्यादि ।
अबतक रचित खण्ड काव्य– ” प्रेम कलश ” और ” जय बजरंगबली “।

अबतक रचित रचनाएँ – ” भारत देश के रीति रिवाज , ” बचपन की यादें ” , “पिता ” , ” निशा सुन्दरी ” , ” मन में मधुमास आ गया (गीत) ” , ” भ्रमर और पुष्प ” , ” काल चक्र ” , ” व्यथा भारत की ” इत्यादि ।

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