नारी शक्ति कविता :- शक्ति स्वरूपा है | Kavita On Nari Shakti

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नारी शक्ति कविता

नारी शक्ति कविता

नारी शक्ति स्वरूपा है,
नारी भक्ति रूपा है।

नारी नादान अबला नहीं सुबला है,
माँ दुर्गा, माँ भवानी, माँ कमला है।

कभी दुर्गा, कभी भवानी,
कभी रणचंडी कभी मर्दानी।

दुष्टों का नाश करने वाली है,
कभी काल रात्रि कभी भद्रकाली है।

नारी है घर में तो घर-घर है,
नारी नहीं तो घर भी बेघर हैं।

नारी फूलों की फुलवारी है,
नारी आँगन की किलकारी है।

नारी जननी भी है
नारी सजनी भी है।

बेटी और माँ भी है नारी,
बहन, नानी, दादी भी है नारी।

इनके बिना न पूरे है रिश्ते,
इनके बिना अधूरे हैं रिश्ते।

फिर बेटियों को जन्म देने से नकार रहे हो,
भ्रूण रूप में ही गर्भ में क्यों मार रहे हो?

बेटियां विश्व पटल पर
देश का नाम रौशन कर रही है,
नारी आज पुरुषों के साथ
कंधे से कंधा मिलाकर चल रही है।

संपूर्ण संसार इसी में समाहित है,
इनकी यश गाथा ग्रंथों में वर्णित है

नारी शक्ति स्वरूपा है,
नारी भक्ति रूपा है।


बिसेन कुमार यादव

यह कविता हमें भेजी है बिसेन कुमार यादव जी ने रायपुर, छत्तीसगढ़ से।

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