प्रकृति प्रेम पर कविता – स्वप्नों की दुनिया में जाकर | Prakriti Prem Par Kavita In Hindi

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प्रकृति प्रेम पर कविता

प्रकृति प्रेम पर कविता

स्वप्नों की दुनिया में जाकर
मैंने देखे दृश्य निराले थे,
प्रकृति के विचित्र नजारों के
क्षण में खुले रहस्यमयी ताले थे।

बातें करते वृक्षों को देखकर
उर व्याकुल हो उठा मेरा,
पथिकों ने उनसे पूछ कर
तय किया अपना डेरा।

पक्षी थे तैरते नदियों में
थी अम्बर में उड़ती मीन,
थी कौवों की आवाज सुरीली
कोयल थी कांव-कांव में लीन।

फूलों ने चहुँ ओर बिखेरा
खुशबू का प्यारा जादू,
भानु के उदय हो जाने से
याम न कर सकी तम काबू।

जुगनू,तारों ने फिर मिलकर
वसुधा को रोशन कर डाला,
षडयंत्र यामिनी का हुआ विफल
हुआ सुखमय प्रतीत अँधेरा काला।

वृक्ष शाखाएँ फैलाकर
विहंगों को बाँट रहे थे फल,
मेघ ने भी उनकी जड़ को
भेंट किया अति मृदु जल।

कोलाहल करते देखा बच्चों को
वृद्ध विटपों ने समक्ष बुलाया,
प्यारी प्रेरक कथा सुनकार
मधुर नींद में उन्हें सुलाया।

प्रकृति के समस्त पुत्रों ने
भेजा एक संदेशा है,
दृष्टिकोण जैसा जिसका
जीवन उसका वैसा है।

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नमस्कार प्रिय मित्रों,

सूरज कुमार

मेरा नाम सूरज कुरैचया है और मैं उत्तर प्रदेश के झांसी जिले के सिंहपुरा गांव का रहने वाला एक छोटा सा कवि हूँ। बचपन से ही मुझे कविताएं लिखने का शौक है तथा मैं अपनी सकारात्मक सोच के माध्यम से अपने देश और समाज और हिंदी के लिए कुछ करना चाहता हूँ। जिससे समाज में मेरी कविताओं के माध्यम से मेरे शब्दों के माध्यम से बदलाव आए।

क्योंकि मेरा मानना है आज तक दुनिया में जितने भी बदलाव आए हैं वह अच्छी सोच तथा विचारों के माध्यम से ही आए हैं अगर हमें कुछ बदलना है तो हमें अपने विचारों को अपने शब्दों को जरूर बदलना होगा तभी हम दुनिया में हो सब कुछ बदल सकते हैं जो बदलना चाहते हैं।

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