प्रेरणाप्रद कविता :- पुरुषार्थ करो | Prernaprad Kavita

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कर्म कर के अपने लक्ष्य को प्राप्त करने का सन्देश देती हुयी ( Prernaprad Kavita ) प्रेरणाप्रद कविता “पुरुषार्थ करो” :-

प्रेरणाप्रद कविता

प्रेरणाप्रद कविता

है प्रेम सुधा रस जीवन में पुरुषार्थ करो और पा जाओ ।।
जो अलख जगे अंतर्मन में तो जगत को ज्योत दिखा जाओ ।।

खद्योत प्रभा की आहट से खग कलरव मधुर किलोल करे,
अति स्नेह उमंग तरंग लिए जीवन में अमिय रस घोल भरे,

मन लगन लगाकर कर्मठ बन और अनुशासन अपना जाओ ।।
है प्रेम सुधा रस जीवन में पुरुषार्थ करो और पा जाओ ।।

जो ज्योत जली है प्राणों में वह ईश्वर का आधान करे,
तुम सत्य स्वीकार करो मन में वह दुखहर्ता व्यवधान हरे,

अभ्यास में द्वंद्व रहा मुखरित धर धैर्य शौर्य दिखला जाओ ।।
है प्रेम सुधा रस जीवन में पुरुषार्थ करो और पा जाओ ।।

यह जगत है जिनकी माया में उनके कुछ संयम नियम हैं,
हम जिन तलाश में खोए हैं वह प्रथम नही वह दोयम है,

नित सत्य समझ, ना उलझ तम में सब अरूणांचल सा छा जाओ ।।
है प्रेम सुधा रस जीवन में पुरुषार्थ करो और पा जाओ ।।

हो अखंड प्रचंड प्रताप सदा भू पर इतिहास पढ़ा जाए,
तो सतपथ पर तत्पर होकर सब में विश्वास बढ़ा जाए,

अब अभी नहीं तो कभी नहीं जो करना है सब कर जाओ ।।
है प्रेम सुधा रस जीवन में पुरुषार्थ करो और पा जाओ ।।

नभ से छटकर नन्हीं बूंदे बन ओस गिरी सब सुमनों में,
दिनकर की सुनहरी रश्मि पड़ी मोती चमकी निज नयनों में,

तो चमक उठो अब ना बैठो श्रम की शक्ति बतला जाओ ।।
है प्रेम सुधा रस जीवन में पुरुषार्थ करो और पा जाओ ।।

पढ़िए :- कर्मयोगी पर कविता | उन कर्मवीरों की क्या बात करें


रचनाकार  का परिचय

जितेंद्र कुमार यादव

नाम – जितेंद्र कुमार यादव

धाम – अतरौरा केराकत जौनपुर उत्तरप्रदेश

स्थाई धाम – जोगेश्वरी पश्चिम मुंबई

शिक्षा – स्नातक

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